संत कबीर दास जी के राम
कबीरदास जी ने अपनी समस्त वाणी में राम नाम का कहीं न कहीं प्रयोग अवश्य किया है जैसे :
जीव सिव सब प्रगटे, वे ठाकुर सब दास ।
कबीर और जाने नहीं, एक राम नाम की आस ॥
सगुण राम और निर्गुण रामा, इनके पार सोई मम नामा ।
सोई नाम सुख जीवन दाता, मै सबसों कहता यह बाता ॥
घट घट राम बसत हैं भाई, बिना ज्ञान नहीं देत दिखाई।
आतम ज्ञान जाहि घट होई, आतम राम को चीन्है सोई।
चार राम हैं जगत में, तीन राम व्यवहार ।
चौथ राम सो सार है, ताका करो विचार ॥
निर्गुण राम निरंजन राया, जिन वह सकल श्रृष्टि उपजाया ।
निगुण सगुन दोउ से न्यारा, कहैं कबीर सो राम हमारा ॥
और एक हम हैं की असल राम को न पहचानकर उसे मंदिरों में ढूंड रहे हैं , मंदिर के लिए लड़ रहे हैं | क्या हमारे राम कबीर जी के राम से भिन्न हैं , और यदि हाँ तब तो बहुत से राम हुए हैं परन्तु प्रचलित एवं प्रसिद्ध केवल दशरथ नंदन राम ही हुए हैं .........

