कहाँ हो राम , या कहाँ नही हो राम !!!
राम स्नेही सभी प्रेमियों को दास का प्रणाम|
भाग दौड़ की इस जिंदगी में आप तो कम ही याद आते हो प्रभु राम , परन्तु सत्य यह भी है की जिसे भी आप याद आते उसे बस आप ही याद आते हो प्रभु राम|
सतयुग में आप की महिमा बहुत थी परन्तु कलयुग में उस काल से भी ज्यादा बढ़ गयी हैं कारण की मनुष्य के पास जो नही होता वही उसे सर्वाधिक प्रिय होता है | ऐसा नही की आज राम नही हैं परन्तु प्रत्यक्ष न हो कर व्यापक रूप में हैं और व्यापक में तो बिरले ही व्याप्तते हैं | सो कुल मिला कर कलयुग में आपकी इतनी मांग के चलते आप अमूल्य हो चले हो प्रभु |
वैसे शास्त्रों में आता है कीआप रोम रोम में बसते हो , कण कण में आपका वास है और अमेरिकी संस्था नासा ने सिद्ध भी किया है (नासा ने अब सिद्ध किया है शास्त्रों में हज़ारों वर्ष पूर्व लिख दिया गया था ) की प्रत्येक अणु के नाभकीय के चारों और इलेक्ट्रान चक्कर लगाते रहते हैं जिस से एक अति सूक्ष्म ध्वनी उत्पन्न होती है जिसे हम ॐ कहते हैं |
कोई तो ऐसी शक्ति है जिसके कारण इलेक्ट्रान न्यूक्लिअस के चारो और चक्कर काटते हैं | क्यूंकि विज्ञान कहता है की बिना ऊर्जा के गति संभव नही और यहाँ तो कण कण से लेकर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड गतिमान है | कहीं इस ऊर्जा का मूल कारण आप ही तो नही हो मेरे प्रभु राम |
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